चेरवा

सबसे पुराने प्रवासियों मे पलामू के चेरोस थे जो कोरिया में चेरवास के रूप में जाने जाते है। उनके परिवार के बुजुगों के अनुसार, वे कुछ चार सौ साल पहले आए थे। कुछ चेरवास पलामू से चले गए थे और चंगभकर में बस गए और बाद में कोरिया आते गए। वे धीरे-धीरे पूरे जिले मे बस गए और ज्यादातर गाँव वासियो ने अपने अपने समुदाय बना लिए थे । बैगा या गांव पुजारी उनके समुदाय से था। वे गांव जिनमे एक भी पुजारी नहीं थे, उन्होने विश्वस्त चेरवा परिवारों को गाँव मे बसाया ताकि उन्हे बैगा लोगो की सेवाए मिल सके
। मिलनसार और उपयोगी उनके समुदायो के सदस्यों का सभी गांवों में स्वागत किया गया। इस प्रकार चेरवा समुदाय जिला भर में फैल गया। वे शासक परिवार के साथ जुड़े रहे और उनके संरक्षण मे थे। इससे उनकेने आर्थिक विकास को भी बल मिला।