राजवाड़े

वे अपने अतीत के इतिहास पर कोई प्रकाश डालने में सक्षम नहीं हैं। वे कोरिया राज्य में एक जमींदारी प्रथा जिसे गुगरा के नाम से जाना जाता है बारह पीढ़ियों तक अपने वंशजो के नक्शे कदम पर चले।इसलिए यह माना जा सकता है कि वे यहाँ बारह पीढ़ियों से अधिक समय से यहाँ है । शायद वे दो से दो सौ पचास साल पहले यहाँ आए । वे पहले सरगुजा में बसे और कुछ समय बाद वे कोरिया आ गये । कोरिया ज़िले के शासक परिवार के करीब होने के वजह से उन्हे सहूलियत दी गयी की वे कही भी बस जाये। प्रारम्भतः वे राजधानी के निकट बसे और राजधानी के साथ स्थान बदले गये। जब उनकी जनसंख्या में वृद्धि हुई है वे जंगलों काटे औरर नई बस्तियों का विकास कर वहाँ बस गये। बुद्धिमान और कड़ी मेहनत की वजह से वे स्थानीय लोगों की तुलना में अधिक संपन्न हो गये। उनके प्रारम्भिक उपनिवेश खरबेट, ओदगी, बिशनपुरr, जमपरा, बर्दिया, कूदेतीi, काठगोड़ी,गुर्गा, लतमा, सरडी, कसरा, बदर आदि में थे।